पद्मांश पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
निर्देश – नीचे दिए गए पद्मांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए:
बहुत दिनों बाद मुझे धूप ने बुलाया I
ताते जल नहा पहन श्वेत वसन आई,
खुले लॉन में बैठ गई दमकती लुनाई,
सूरज खरगोश धवल गोद उछल आया I
बहुत दिनों बाद मुझे धूप ने बुलाया I
नभ के उद्यान-छत्र तले भेज टीला,
पड़ा हरा फूल कढ़ा मेज़पोश पीला,
वृक्ष खुली पुस्तक हर पृष्ठ फड़फड़ाया I
बहुत दिनों बाद मुझे धूप ने बुलाया I
पैरों में मखमल की जूती सी क्यारी,
मेघ ऊन का गोला बुनती सुकुमारी,
डोलती सलाई हिलता जल लहराया I
बहुत दिनों बाद मुझे धूप ने बुलाया I
बहुत दिनों बाद मुझे धूप ने बुलाया I
ताते जल नहा पहन श्वेत वसन आई,
खुले लॉन में बैठ गई दमकती लुनाई,
सूरज खरगोश धवल गोद उछल आया I
बहुत दिनों बाद मुझे धूप ने बुलाया I
नभ के उद्यान-छत्र तले भेज टीला,
पड़ा हरा फूल कढ़ा मेज़पोश पीला,
वृक्ष खुली पुस्तक हर पृष्ठ फड़फड़ाया I
बहुत दिनों बाद मुझे धूप ने बुलाया I
पैरों में मखमल की जूती सी क्यारी,
मेघ ऊन का गोला बुनती सुकुमारी,
डोलती सलाई हिलता जल लहराया I
बहुत दिनों बाद मुझे धूप ने बुलाया I
104. ‘मेघ ऊन का गोला बुनती सुकुमारी’ से आशय है –
1. समुद्र की लहरें उफन रही हैं I
2. आकाश में सतरंगे बादल छाए हैं I
3. वृक्ष पर पत्ते लहरा रहे हैं I
4. नभ में श्वेत बादल उड़ रहे हैं I
Click To Show Answer
Answer – (4)
