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निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिएः
बज रहा है शंख रण-आह्नान का,
बढ़ सिपाही के सदृश बलिदान कर,
आँख में लेकर चमक संकल्प की,
ले हृदय उत्साह वाणी में प्रबल।
तू भुजा में नित अमित बल-शक्ति ले,
और संशयहीन चिंतन ले सबल।
बढ़ अरे ओ देश के प्यारे तरुण,
सिंह-सम पाषाण सीना तानकर।
ओ नए युग के युवक नव शक्तिमय,
पथ अँधेरे से ढका सब ओर है।
सूर्य-सम दीपित उठाकर भाल को,
देख कैसा सभ्यता का भोर है।
पार्थ के सम आँख के प्रतिबिंब से,
ओ तरुण उठ लक्ष्य का संधान कर।
हस्तगत करके विजय सब ओर बढ़,
शत्रु के अभिमान-मंडित शीश चढ़।
मुक्ति के संघर्ष में कर दिग्विजय,
आज फिर नव एकता के पाठ पढ़,
खटखटाती द्वार है युग-चेतना,
तोड़ दे ये लौह-पट तू आनकर।।
बज रहा है शंख रण-आह्नान का,
बढ़ सिपाही के सदृश बलिदान कर,
आँख में लेकर चमक संकल्प की,
ले हृदय उत्साह वाणी में प्रबल।
तू भुजा में नित अमित बल-शक्ति ले,
और संशयहीन चिंतन ले सबल।
बढ़ अरे ओ देश के प्यारे तरुण,
सिंह-सम पाषाण सीना तानकर।
ओ नए युग के युवक नव शक्तिमय,
पथ अँधेरे से ढका सब ओर है।
सूर्य-सम दीपित उठाकर भाल को,
देख कैसा सभ्यता का भोर है।
पार्थ के सम आँख के प्रतिबिंब से,
ओ तरुण उठ लक्ष्य का संधान कर।
हस्तगत करके विजय सब ओर बढ़,
शत्रु के अभिमान-मंडित शीश चढ़।
मुक्ति के संघर्ष में कर दिग्विजय,
आज फिर नव एकता के पाठ पढ़,
खटखटाती द्वार है युग-चेतना,
तोड़ दे ये लौह-पट तू आनकर।।
103. ‘पार्थ के सम आँख के प्रतिबिम्ब से’ कथन किस पौराणिक कथा को संकेत करता है?
1. कृष्ण का अर्जुन को गीत सुनाना
2. अर्जुन द्वारा मछली की आँख में तीर मारना
3. अर्जुन के रथ को कृष्ण द्वारा हाँकना
4. अर्जुन का तीरंदाजी सीखना
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Answer – (2)