141. निशामहोदया सप्तमीकक्षाया: छात्रान् वाक्यप्रकारान् पाठयति। सा वाक्यसम्बद्धव्याकरणनियमानां व्याख्यया आरभते तदन्तरम् सा सामान्य: श्रूयमाण-वाक्यानां उदाहरणानि प्रस्तौति। सा किं शिक्षण-प्रविधिं अनुसरति?
1. निगमनत: आगमनम् प्रति
2. मूर्तत: मूर्तं प्रति
3. विश्लेषण: संश्लेषण प्रति
4. आगमनत: निगमनं प्रति
Click To Show Answer
Answer -(1)
निशा महोदया ‘निगमन-आगमन’ शिक्षण विधि का प्रयोग कर रही हैं। निगमन विधि – इस विधि में अध्यापक विद्यार्थियों को पहले एक सूत्र, नियम अथवा सिद्धान्त बताकर उदाहरण देता है फिर उसके आधार नियम, सिद्धान्त की पुष्टि करता है। निगमन विधि निम्न सूत्रों पर आधारित होती है– (क) नियम से उदाहरण की ओर, (ख) सामान्य से विशिष्ट की ओर, (ग) सूक्ष्म से स्थूल की ओर, (घ) अज्ञात से ज्ञात की ओर, (ङ) प्रमाण से प्रत्यक्ष की ओर।
आगमन विधि – प्रत्यक्ष उदाहरणों, अनुभवों तथा प्रयोगों से निष्कर्ष निकालकर नियम, सूत्र तथा सिद्धान्त की स्थापना की जाती है। इस विधि में तर्क करने हेतु ‘विशिष्ट से सामान्य की ओर’ तथा ‘स्थूल से सूक्ष्म की ओर’ आगे बढ़ते हैं। उदाहरण निगमन आगमन अक परे सवर्ण अक होने पर दीर्घ सन्धि होती है। ‘अक: सवर्णे दीर्घ:’ विद्या + आलय: · विद्यालय: नदी + ईश: · नदीश:, यहाँ ई परे ई आया है। अत: दोनों के स्थान पर दीर्घ एकादेश होकर दीर्घ सन्धि हुई। अक परे सवर्ण अक होने पर दीर्घ सन्धि होती है। ‘अक: सवर्णे दीर्घ:’ विद्या + आलय: · विद्यालय:
निशा महोदया ‘निगमन-आगमन’ शिक्षण विधि का प्रयोग कर रही हैं। निगमन विधि – इस विधि में अध्यापक विद्यार्थियों को पहले एक सूत्र, नियम अथवा सिद्धान्त बताकर उदाहरण देता है फिर उसके आधार नियम, सिद्धान्त की पुष्टि करता है। निगमन विधि निम्न सूत्रों पर आधारित होती है– (क) नियम से उदाहरण की ओर, (ख) सामान्य से विशिष्ट की ओर, (ग) सूक्ष्म से स्थूल की ओर, (घ) अज्ञात से ज्ञात की ओर, (ङ) प्रमाण से प्रत्यक्ष की ओर।
आगमन विधि – प्रत्यक्ष उदाहरणों, अनुभवों तथा प्रयोगों से निष्कर्ष निकालकर नियम, सूत्र तथा सिद्धान्त की स्थापना की जाती है। इस विधि में तर्क करने हेतु ‘विशिष्ट से सामान्य की ओर’ तथा ‘स्थूल से सूक्ष्म की ओर’ आगे बढ़ते हैं। उदाहरण निगमन आगमन अक परे सवर्ण अक होने पर दीर्घ सन्धि होती है। ‘अक: सवर्णे दीर्घ:’ विद्या + आलय: · विद्यालय: नदी + ईश: · नदीश:, यहाँ ई परे ई आया है। अत: दोनों के स्थान पर दीर्घ एकादेश होकर दीर्घ सन्धि हुई। अक परे सवर्ण अक होने पर दीर्घ सन्धि होती है। ‘अक: सवर्णे दीर्घ:’ विद्या + आलय: · विद्यालय:
